Buy Tolstoy Aur Saikil (Hb), 9789389577341 at Best Price Online - Buy Books India

Tolstoy Aur Saikil (Hb)

Author :

Kedarnath Singh

Publisher:

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Rs221 Rs295 25% OFF

Availability: Out of Stock

Shipping-Time: Usually Ships 1-3 Days

Out of Stock

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Rajkamal Parkashan Pvt Ltd

Publication Year 2020
ISBN-13

9789389577341

ISBN-10 9789389577341
Binding

Hardcover

Number of Pages 139 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 x 14 x 1.5
Weight (grms) 290
Subject

Poetry

ताल्सताय और साइकिल केदारनाथ सिंह की कविताओं का एक ऐसा संग्रह है, जो सबसे पहले कविता को देशज-नागर-वैश्विक इतिहास और भूगोल-विमर्श के बीच एक पुल बनाता है। केदारनाथ सिंह का काव्य-समय एक न होकर अनेक है और सांस्कृतिक बहुलता को अर्थ देता है। पहले की, पर लम्बे समय से बनी पहचान को यह छंद और छंद के बाहर नया विस्तार देनेवाला संग्रह है। एक कविता के शीर्षक के अनुसार ही कहें, यह एक ज़रूरी चिट्ठी का मसौदा है। पानी की प्रार्थना, त्रिनीदाद, पांडुलिपियाँ, घोंसलों का इतिहास, बुद्ध से, ईश्वर और प्याज, बर्लिन की टूटी दीवार को देखकर, जे.एन.यू. में हिन्दी और शहरबदल जैसी कविताएँ अपनी अन्तर्वस्तु में गहन और बनावट में अपूर्व हैं। लुखरी का आत्मव्यंग्य न दूसरों को ब$ख्शता है, न अपने को! फंतासी और अयथार्थ भी आज की जटिल सच्चाई के ही सगोतिया हैं। केदारनाथ सिंह की हर कविता एक नया प्रस्थान है जो काव्यात्मक-अकाव्यात्मक, सहज-जटिल को एक साथ साधने की विलक्षण कला का साक्ष्य है। जो कवि ताल्सताय और साइकिल जैसी कविता लिख सकता है, जो चींटियों की रुलाई सुन सकता है, जो इब्राहीम मियाँ ऊँटवाले को पहचान सकता है, उस कवि को गहरी समझ के साथ ही पढ़ा जा सकता है। यह कविता और मनुष्य को बचाने की ऐसी कोशिश है जो देह-देहान्तर के रिश्तों को पहचानने में सक्षम है। ताल्सताय और साइकिल केदारनाथ सिंह की लम्बी काव्य-यात्रा का एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ समकालीन अनुभव के कई ऐसे धरातल उभरते दिखाई पड़ते हैं, जो उसके नए अनुषंगों को खोलते हैं और कई बार उसकी सुपरिचित परिधि को अतिक्रान्त भी करते हैं।

Kedarnath Singh

केदारनाथ सिंह का जन्म सन् 1934 में बलिया, उत्तर प्रदेश के चकिया गाँव में हुआ। आधुनिक हिन्दी कविता में बिम्बविधान विषय पर सन् 1964 में पीएच.डी.। सन् 1976 से 1999 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केन्द्र में अध्यापन। प्रकाशित कृतियाँ : अभी, बिलकुल अभी, ज़मीन पक रही है, यहाँ से देखो, अकाल में सारस, उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ, तालस्ताय और साइकिल, बाघ, सृष्टि पर पहरा, मतदान केन्द्र पर झपकी, प्रतिनिधि कविताएँ (काव्य-संग्रह)। कल्पना और छायावाद, आधुनिक हिन्दी कविता में बिम्बविधान, मेरे समय के शब्द, कब्रिस्तान में पंचायत (गद्य-कृतियाँ) तथा मेरे साक्षात्कार (संवाद)
No Review Found
Similar Books
More from Author