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Yahan Se Dekho

Author :

Kedarnath Singh

Publisher:

Radhakrishna Prakashan

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Publisher

Radhakrishna Prakashan

Publication Year 2019
ISBN-13

9788171195060

ISBN-10 8171195067
Binding

Hardcover

Number of Pages 88 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 X 14.5 X 1
Subject

Poetry

केदारनाथ सिंह की कविताओं का संसार क़रीब-क़रीब समूचा भारतीय संसार हैवह इस अर्थ में कि उन्हें उन तमाम स्रोतों का पता है जहाँ से जीवन मिलता हैभले ही आज की सर्वव्यापी मानव-विरोधी मुहिम में वह जीवन कुछ कम हो चला हो और कभी-कभी उसके लुप्त हो जाने का भी ख़तरा होऔर केदारनाथ सिंह की इस आस्था को उनसे छीन लेना असम्भव है कि मानवीय अस्तित्व कोआज के भारत में आदमी बनकर रहने की इच्छा को, अर्थ तथा बल देने के लिए उन्हीं स्रोतों पर पहुँचना होगा और जिस ज़मीन से वे निकल रहे हैं, उसे ही और गहरा खोदना होगा।...इस प्रक्रिया में केदारनाथ सिंह की भाषा और नम्य और पारदर्शक हुई है और उसमें एक नई ऋजुता और बेलौसी दिखाई पड़ती है।विष्णु खरे जीवन तो हर अच्छे कवि की कविताओं में होता है। लेकिन जीवन की स्थापना बहुत कम कवि कर पाते हैं। टूटा हुआ ट्रक भी पूरी तरह निराश नहीं है। बिलकुल मशीनी चीज़ टूटने के बाद भी यात्रा पर चल देने को तैयार है। वनस्पति इसकी मरम्मत कर रही है...जो क्षुद्र है, नष्टप्राय है उसे देखकर भी केदार जी को लगता है कि जीवन रहेगा, पृथ्वी रहेगी—‘‘सिर्फ़ इस धूल का लगातार उड़ना है जो मेरे यकीन को अब भी बचाए हुए हैनमक में, पानी में और पृथ्वी के भविष्य में।’’ जो नष्ट हो जाता है वह कितना ही क्षुद्र क्यों हो, उन्हें दुखी करता है (कीड़े की मृत्यु) जीवन के प्रति यह सम्मान ही केदार जी के इस संग्रह की मुख्य अन्तर्वस्तु है।अरुण कमल

Kedarnath Singh

केदारनाथ सिंह का जन्म सन् 1934 में बलिया, उत्तर प्रदेश के चकिया गाँव में हुआ। आधुनिक हिन्दी कविता में बिम्बविधान विषय पर सन् 1964 में पीएच.डी.। सन् 1976 से 1999 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केन्द्र में अध्यापन। प्रकाशित कृतियाँ : अभी, बिलकुल अभी, ज़मीन पक रही है, यहाँ से देखो, अकाल में सारस, उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ, तालस्ताय और साइकिल, बाघ, सृष्टि पर पहरा, मतदान केन्द्र पर झपकी, प्रतिनिधि कविताएँ (काव्य-संग्रह)। कल्पना और छायावाद, आधुनिक हिन्दी कविता में बिम्बविधान, मेरे समय के शब्द, कब्रिस्तान में पंचायत (गद्य-कृतियाँ) तथा मेरे साक्षात्कार (संवाद)
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