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| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Publication Year | 1966 |
| ISBN-13 | 9788126706723 |
| ISBN-10 | 8126706724 |
| Binding | Hardcover |
| Number of Pages | 344 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 22 × 14 × 2 |
| Weight (grms) | 300 |
| Subject | Novel |
आधा गाँव, यानी गंगौली। ज़िला ग़ाज़ीपुर (उत्तर प्रदेश)। काल-परिप्रेक्ष्य–1947, स्वाधीनता के समय होनेवाला देश-विभाजन। गंगौली मुस्लिम-बहुल गाँव है और यह उपन्यास है–इस गाँव के मुसलमानों का बेपर्द जीवन-यथार्थ। पूरी तरह सच, बेबाक और धारदार। पाकिस्तान बनते समय मुसलमानों की विविध मन:स्थितियों, हिन्दुओं के साथ उनके सहज आत्मीय संबंधों तथा द्वंद्वमूलक अनुभवों का अविस्मरणीय शब्दांकन। सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ एक ऐसा सृजनात्मक प्रहार, जो दुनिया में कहीं भी राष्ट्रीयता ही के हक़ में जाता है।
लेखकीय चिंता सार्वजनीन है कि गंगौली में अगर गंगौलीवाले कम तथा सुन्नी और शिया और हिन्दू ज़्यादा दिखाई देने लगें, तो गंगौली का क्या होगा?...दूसरे शब्दों में, गंगौली को यदि भारत मान लिया जाए तो भारत का क्या होगा? भारतीय कौन होंगे?...अपनी वस्तुगत चिंताओं, गतिशील रचनाशिल्प, आंचलिक भाषा-सौंदर्य और सांस्कृतिक परिवेश के चित्रण की दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण उपन्यास–हिन्दी कथा-साहित्य की बहुचर्चित और निर्विवाद उपलब्धि।
इस कृति की सबसे बड़ी ख़ासियत है–संयमहीनता। इसके सभी पात्र बिना लगाम के हैं और उनकी अभिव्यक्ति सहज, सटीक और दो टूक है, गालियों की हद तक।
Rahi Masoom Raza
Rajkamal Prakashan