From SEX to SUPERCONSCIOUSNESS (सम्भोग से समाधि की ओर)

Author :

Osho

Publisher:

Q FORD

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Publisher

Q FORD

Publication Year 2019
ISBN-13

9789390718016

ISBN-10 9390718015
Binding

Paperback

Edition First
Number of Pages 156 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 X 14 X 1
Weight (grms) 220
एक क्षण के लिए तुम एक हो जाते हो, दो का भेद समाप्त हो जाता है, तुम्हारे लिए समय तथा मन की चाल रुक जाती है, तुम्हारा मस्तिष्क विचार शून्य हो जाता है। ऐसा न होने की दशा में सम्भोग के शीर्ष को छू पाना सम्भव नहीं। उस दौरान तुम्हारे सभी विचार ऐसे तिरोहित हो जाते हैं जैसे वे तुम्हारे लिए पूरी तरह व्यर्थ हों ! तुम उपस्थित होते हो, लेकिन बिना किसी विचार के। तुम वहाँ होते हुए भी नहीं होते। ऐसा केवल क्षण भर के लिए ही घटित होता है, जिसे आसानी से चूका जा सकता है। यह अन्तराल इतना क्षणिक है कि अनेक जन्मों से तुम चूके जा रहे हो। हमने सेक्स को सिवाय अपशब्दों के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम तो इस पर बात करने में भी भयभीत होते हैं। हमने इसे इस भांति छिपा कर रख दिया है जैसे यह है ही नहीं, जैसे जीवन में इसका कोई स्थान है ही नहीं। जबकि सच्चाई तो यह है कि इससे अधिक महत्वपूर्ण मनुष्य के जीवन में और कुछ भी नहीं है, परन्तु इसे छुपाया गया है, इसको दबाया गया है। परिणामस्वरूप मनुष्य सेक्स से मुक्त नहीं हो पाया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया है। काम, जो कि समस्त संसार में उत्पत्ति का एकमात्र माध्यम है, के विषय में जो भी भ्रान्तियाँ फैलाई गई हैं, इसके प्रति हमारी अज्ञानता की सूचना देती है। हमारे द्वारा प्रेम के मार्ग में खड़ी की गई बाधाएँ अगर हटा दी जाएं तो प्रेम की धारा को परमात्मा तक पहुँचने से कौन रोक सकता है! परन्तु हम इसके बारे में जानना-समझना ही नहीं चाहते। हममें इस विषय पर बात तक करने का साहस नहीं है। यह किस प्रकार का भय है जो हमें सच्चाई तक पहुँचने से रोक रहा है ?

Osho

Osho is an Indian mystic and philosopher. He has spoken on major spiritual traditions including Jainism, Hinduism, Hassidism, Tantrism, Christianity, Buddhism, on a variety of Eastern and Western mystics and on sacred scriptures such as the Upanishads.
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