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Khadoos

Author :

Ashok Mishra

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs254 Rs299 15% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373481470

ISBN-10 9373481479
Binding

Hardcover

Number of Pages 76 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 200
Subject

Poetry

व्यंग्य और हास्य को हथियार बना के इन्सानी दुखों से निपटना नाटककार अशोक मिश्रा की ख़ासियत है। उनके लेखन में सिनेमा जैसी दृश्यात्मकता और शायराना अन्दाज़ है। मुश्किल परिस्थितियों और जटिल मनोवैज्ञानिक हलचलों को सरल-सहज ढंग से आम जन तक पहुँचा देने में नाटककार की मास्टरी नज़र आती है। नाटककार को रंगमंच का दीर्घकालीन अनुभव है इसलिए वो मंचन की व्यावहारिकता को समझते हैं। नाटक में ज़्यादा तामझाम नहीं है। प्रकाश व्यवस्था के कल्पनाशील प्रयोग से वो अन्दर-बाहर का संसार रचते हैं । कहानी एक घर से, दूसरे के घर चुटकियों में पहुँच जाती है। फ़्लैश बैक का सिनेमेटिक उपयोग नाटक के कथ्य को विस्तार देते हुए एकरस होने से बचाता है। खड़ूस के कथ्य, शिल्प और भाषा में नवीनता है। चरित्रों में व्याकुलता और उनकी बातचीत में चुटिलता है। इतना यथार्थवादी लेखन कि लगता है आप नाटक नहीं बल्कि कुछ लोगों के घर में घुस कर उनकी ज़िन्दगी से रूबरू हो रहे हैं। अम्मी का पहाड़ जैसा दुःख, सलमा की लाचारी, मुस्कान की बेबसी से उपजी विरोध की ताक़त, क़ुर्बान की आवारगी, अरमान की मोहब्बत–सब घुल-मिल कर एक ऐसी ऊबड़-खाबड़ दुनिया रचते हैं जिसमें दर्शकों को लोटपोट करने और कई मसलों पर एक गम्भीर विमर्श शुरू करने का सामर्थ्य है। अम्मी, सलमा और मुस्कान हालातों से लड़ने वाली औरतों की सुन्दर मिसाल बन पड़े हैं। नाटक का दब्बू-सा नायक अरमान अपने फ़ैसलों की वजह से अन्ततः एक सशक्त चरित्र बन कर उभरता है। निश्चित ही खड़ूस अपार सम्भावनाओं से भरा-पूरा, बेहद मनोरंजक और एक नये मिज़ाज का नाटक है।

Ashok Mishra

अशोक मिश्रा नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा, नयी दिल्ली के स्नातक (1982), पटकथा लेखक, गीतकार, अभिनेता, नाट्य निर्देशक। ‘भारत एक खोज’, ‘अमरावती की कथाएँ’, ‘मृग नयनी’, ‘सहर’, ‘संक्रांति’, ‘इन्तज़ार’ आदि धारावाहिकों का लेखन। ‘कटहल’, ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘वेल्डन अब्बा’, ‘नसीम’, ‘समर’, ‘बवंडर’, ‘कभी पास कभी फेल’, ‘दुर्गा’, ‘भैरवी’, जैसी चर्चित फ़िल्मों में पटकथा और गीत लेखन। ‘समर’ और ‘नसीम’ फ़िल्मों के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखन के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित। ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ में सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन हेतु ‘स्टार स्क्रीन एवार्ड’। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग का प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय किशोर कुमार एवार्ड’। हाल ही में उनकी लिखी फ़िल्म ‘कटहल—ए जेकफ़्रूट मिस्ट्री’ को सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फ़िल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके लिखे नाटक ‘बजे ढिंढोरा उर्फ़ ख़ून का रंग’, ‘गांधी चौक’, ‘अटके-भटके-लटके सुर’, ‘सड़क’, ‘पत्थर’ ,‘कचरे की हिफ़ाज़त’, ‘रास बिहारी टिकिट कलेक्टर’ और ‘माइंड ब्लोईंग मेनेक्विन’ काफ़ी खेले जाते हैं। विभिन्न शहरों में पटकथा लेखन और रंग शिविरों का संचालन एवं नाट्य निर्देशन भी करते रहे हैं। सम्पर्क : ashok_mishra2000@yahoo.com
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