| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373482767 |
| ISBN-10 |
9373482769 |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
160 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
250 |
| Subject |
Biographies & Autobiographies |
फ़िराक़ साहब के क़िस्से बहुत सारे हैं, बहुत मशहूर हैं और बहुत मज़े के हैं। हमें अपने आस- पास अक्सर सुनाई देते हैं। इन क़िस्सों को सुनाकर कोई गुफ़्तगू में असर पैदा कर रहा होता है, कोई महफ़िल लूट रहा होता है। ये क़िस्से हमारी ज़बानी रिवायत का हिस्सा बनकर सीना-ब-सीना आगे बढ़ते रहते हैं। सलमान साहब ने ये शानदार काम कर डाला। बड़े जुनून और इंहिमाक के साथ। फ़िराक़ साहब के क़िस्से जब मिले, जहाँ मिले, जैसे मिले, उन्हें जमा किया और एक किताब की शक्ल दे दी। अब जो मेरी तरह क़िस्सों में जीने मरने वाले लोग हैं, उन्हें फ़िराक़ साहब के अनगिनत यादगार क़िस्से इस एक किताब में मिल जायेंगे। इस किताब को पढ़ने के बाद फ़िराक़ साहब आपके थोड़ा और, थोड़ा और क़रीब आ जायेंगे। ज़बानी रिवायत का एक बहुत क़ीमती ज़ख़ीरा सलमान ने सहेज लिया है और हमेशा के लिए महफ़ूज़ कर लिया है।
—डॉ. हिमांशु बाजपेयी
Salman Shamsi
सलमान शम्सी
एन.सी.सी. ग्रुप लखनऊ के बेस्ट कैडेट रह चुके सलमान शम्सी की ज़िन्दगी का रुख़ सेना में अधिकारी बनने की तैयारी करते हुए साहित्य की ओर किस तरह मुड़ गया यह भी एक दिलचस्प क़िस्सा है। वर्ष 2013 में लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए. करते हुए पहली बार इनका सामना उर्दू अदब से हुआ। उर्दू और हिन्दी अदब पढ़ते हुए ही वर्ष 2016 में आपने बाक़ायदा उर्दू भाषा को पढ़ना और लिखना सीखा और 2020 में आलिम की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। आपको जोश मलीहाबादी और फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी और शख़्सियत दोनों पर ही अच्छी जानकारी है।
सन् 2024 में इन्होंने चर्चित इंटरव्यू सीरीज़ ‘बातें फ़िराक़ की’ के एडिटर के तौर पर काम किया और अब हिन्दी तथा उर्दू साहित्य के अध्ययन व प्रचार में सक्रिय हैं।
ईमेल : salmanshamsiwrites@gmail.com
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