Vichar Niyam - Hindi

Author :

Sirshree

Publisher:

Prabhat Prakashan

Rs338 Rs450 25% OFF

Availability: Available

Shipping-Time: Usually Ships 1-3 Days

    

Rating and Reviews

0.0 / 5

5
0%
0

4
0%
0

3
0%
0

2
0%
0

1
0%
0
Publisher

Prabhat Prakashan

Publication Year 2015
ISBN-13

9789351864912

ISBN-10 935186491X
Binding

Hardcover

Number of Pages 200 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 22 X 14 X 2
Weight (grms) 400
  • आत्मिक यात्रा का सहयोगी: सरश्री की अपनी आध्यात्मिक खोज की कहानी से प्रेरित होकर, यह पुस्तक आपको जीवन के गहरे सवालों के जवाब तलाशने में सहयोग देती है। यह आपको आत्म-साक्षात्कार की यात्रा पर ले चलती है, जहाँ आप अपनी असली पहचान को समझ पाते हैं।
  • विचारों में है शक्ति: पुस्तक बताती है कि हमारे विचारों में अपार शक्ति है। यह सिखाती है कि विचारों को सकारात्मक दिशा देकर हम अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं। नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करने और सकारात्मक सोच विकसित करने के तरीके भी इसमें मिलते हैं।
  • शांति और आनंद का मार्ग: पुस्तक आपको तनाव, चिंता और नकारात्मकता से मुक्ति पाने का रास्ता दिखाती है। यह सिखाती है कि हम अपने विचारों को नियंत्रित करके आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, जीवन में खुशी और पूर्णता पाने के लिये दिशानिर्देश भी देती है।
  • सरल भाषा, गहरा ज्ञान: जटिल आध्यात्मिक विषयों को भी सरल और सहज भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक किसी भी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के लिए उपयुक्त है।
  • जीवन जीने का नया नजरिया: "विचार नियम" आपको जीवन जीने का एक नया नजरिया प्रदान करती है। यह आपको अधिक सकारात्मक, संतुलित और बेहतर इंसान बनने में मदद करती है।

 

"विचार नियम" पुस्तक उन लोगों के लिए अवश्य पढ़ने योग्य है जो आध्यात्मिकता की खोज में हैं और जीवन में अधिक खुशी और पूर्णता प्राप्त करना चाहते हैं। यह पुस्तक आपको जीवन के बारे में एक नया दृष्टिकोण देगी और आपको एक बेहतर व्यक्ति बनने में मदद करेगी।

Sirshree

सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था i इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया i इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया i उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया i जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लम्बी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी, जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ i सरश्री ने दो हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सत्तर से अधिक पुस्तकों की रचना की है, जिन्हें दस से अधिक भाषाओँ में अनुवादित किया जा चुका है i
No Review Found
More from Author