यामा में महादेवी की काव्य-यात्रा के चार आयाम संगृहीत हैं—‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’ तथा ‘सांध्यगीत’ जो भाव और चिन्तन-जगत् की क्रमबद्धता के कारण महत्त्वपूर्ण हैं। प्रत्येक आयाम में नवीनता तथा विशिष्टता का परिचय दिया गया है, फिर भी अपेक्षाकृत मानवीकरण एवं प्रतीकात्मकता पर बल दिया गया है। प्रकृति के स्थूल सौन्दर्य में भी प्रायः महादेवी ने मानवीय भावनाओं व क्रिया-कलापों का साक्षात्कार किया।
Mahadevi Verma
महादेवी वर्मा,जन्म: 1907, फर्रुख़ाबाद (उ.प्र.)। शिक्षा : मिडिल में प्रान्त-भर में प्रथम, इंट्रेंस प्रथम श्रेणी में, फिर 1927 में इंटर, 1929 में बी.ए., 1932 में प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.एम. किया प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य और 1960 में कुलपति। ‘चाँद’ का सम्पादन। ‘विश्ववाणी’ के ‘युद्ध अंक’ का सम्पादन। ‘साहित्यकार’ का प्रकाशन व सम्पादन। नाट्य संस्थान ‘रंगवाणी’ की प्रयाग में स्थापना। पुरस्कार : ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’, ‘नीरजा’ पर ‘सेकसरिया पुरस्कार’, ‘स्मृति की रेखाएँ’ पर ‘द्विवेदी पदक’, ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’, उत्तर प्रदेश सरकार का ‘विशिष्ट पुरस्कार’, उ.प्र. हिन्दी संस्थान का ‘भारत भारती पुरस्कार’। उपाधियाँ : भारत सरकार की ओर से ‘पद्मभूषण’ और फिर ‘पद्मविभूषण’ अलंकरण। विक्रम, कुमाऊँ, दिल्ली, बनारस विश्वविद्यालयों से डी.लिट्. की उपाधि। ‘साहित्य अकादेमी’ की सम्मानित सदस्या रहीं। प्रमुख कृतियाँ : ‘अतीत के चलचित्र’, ‘शृंखला की कड़ियाँ’, ‘स्मृति की रेखाएँ’, ‘पथ के साथी’ (रेखाचित्र); ‘क्षणदा’, ‘साहित्यकार की आस्था’, ‘संकल्पित’ (निबन्ध); ‘मेरा परिवार’ (संस्मरण); ‘सम्भाषण’ (भाषण); ‘चिन्तन के क्षण’ (रेडियो वार्ता); ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्यगीत’, ‘दीपशिखा’, ‘प्रथम आयाम’, ‘अग्निरेखा’, ‘यात्रा’ (कविता-संग्रह)। निधन : 11 सितम्बर, 1987
Mahadevi Verma
LOKBHARTI PRAKASHAN