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| Publisher | HIND YUGM |
| Publication Year | 2026 |
| ISBN-13 | 9788169516150 |
| ISBN-10 | 8169516153 |
| Binding | Paperback |
| Number of Pages | 256 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Weight (grms) | 214 |
| Subject | Travel Writing |
थ्योरी को प्रैक्टिस से जोड़कर ही सामाजिक ज्ञान बनता है। फ़्रांसीसी इतिहासकार मार्क ब्लोच ने ठीक लिखा है : समाजशास्त्री को मज़बूत जूते पहनने चाहिए। राकेश ने इसमें छत्री, साइकिल और टेंट भी जोड़ दिया है और हमारे सामने बस्तर की नायाब असलियत पेश की है। राकेश ने ज़िंदगी को जीने की एक ऐसी राह चुनी है जिससे कई लोगों को रश्क होता है। दूसरी तरफ़ आज के इस ग्लेमर-शुदा समाज में शायद चंद लोग इन्हें दीवाना ही मानें। बहरहाल, ये आत्मीय किताब एक जुनून का नतीजा नहीं तो और क्या है? हिंदुस्तान ऐसे दीवानों का मुश्ताक़ है। तारीख़ गवाह है कि कई मुल्कों में कुछ कर गुज़रने वाले दरवेश ही होते हैं। अगर डॉ. चे ग्वेरा मोटरसाइकिल पर दक्षिण अमेरिका के गाँवों, पहाड़ों और जंगलों की सैर नहीं करते तो कायनात एक क्रांतिकारी से महरूम रह जाती। राकेश भी हिंदुस्तानी परिवेश में किसी क्रांतिकारी से कम नहीं हैं। साइकिल से 28000 किलोमीटर के देश भ्रमण का नतीजा ये बेहतरीन पुस्तक है। किताब बस्तर के अद्भुत सौंदर्य और वहाँ के लोगों के नैसर्गिक लोकतांत्रिक जीवन की बेमिसाल तस्वीर है। बस्तर में एक नज़दीकी और मासूमियत है जिसका ये सहज साहित्यिक वर्णन हमारे दिल को ख़ुशी और उम्मीद से भर देता है।
Rakesh Kumar Singh
HIND YUGM