प्रत्येक समाज अपने विकास के क्रम में ज्ञान के अपने संस्रोत विकसित करता है , जो समझने की अन्त : दृष्टि देते हैं । किन्तु भारतीय समाज को समझने की जो दृष्टियाँ हैं उनमें औपनिवेशिकता एवं पश्चिमी ज्ञान संदर्भो की भरमार है । हमें अपने समाज को समझने के लिए देशज चिन्तन दृष्टि की आवश्यकता है । यह पुस्तक समाज विज्ञान के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण देशज चिन्तन दृष्टियों को मुख्य विमर्श का हिस्सा बनाने का एक छोटा सा प्रयास है जो कि अभी तक साहित्य , लोक या गल्प के नाम पर हाशिए पर रही हैं ।
Badri Narayan
बद्री नारायण हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। नवें दशक के कवियों में सर्वाधिक चर्चित। आप सामाजिक इतिहास एवं सांस्कृतिक मानवविज्ञान के विशेषज्ञ भी हैं। हिन्दी के एक प्रतिष्ठित कवि होने के साथ-साथ आप उत्तर भारत की आधारभूत राजनीतिक समझ और निर्मितियों की पहचान करनेवाले समाजविज्ञानी के रूप में भी जाने जाते हैं। आपके प्रकाशित कविता-संग्रह हैं—‘खुदाई में हिंसा’, ‘शब्दपदीयम’ और ‘सच सुने कई दिन हुए’। आपकी प्रतिनिधि कविताओं की पुस्तक भी शीघ्र ही प्रकाशित होनेवाली है। आप ‘भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार’, ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’, ‘केदार सम्मान’, ‘स्पंदन कृति पुरस्कार’, ‘राष्ट्रकवि दिनकर पुरस्कार’, ‘शमशेर सम्मान’, ‘मीरा स्मृति सम्मान’ से सम्मानित हो चुके हैं। आपकी कविताएँ अंग्रेजी, बांग्ला, उडिय़ा, मलयालम, उर्दू तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। आपने देश-विदेश के अनेक साहित्यिक मंचों पर काव्य-पाठ किया है। आप कविता लिखने के साथ-साथ उस पर हो रहे चिन्तन एवं विमर्श के एक प्रखर हस्ताक्षर के रूप में भी जाने जाते हैं। हिन्दी तथा अंग्रेजी के शीर्षस्थ पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक विशेषणों पर आधारित आपके कॉलम भी प्रकाशित होते रहे हैं। आपके वैचारिक निबन्धों की कई पुस्तकें प्रकाशित हैं।
Dr. Archana Singh
Badri Narayan
,Dr. Archana Singh
LOKBHARTI PRAKASHAN