Sukhi Dampatya Jeevan (Hindi)

Author:

Sheela Saluja

,

Chunni Lal Saluja

Publisher:

V & S Publisher

Rs115 Rs195 41% OFF

Availability: Available

Publisher

V & S Publisher

Publication Year 2017
ISBN-13

9789350576991

ISBN-10 9350576996
Binding

Paper Back

Edition First
Number of Pages 64 Pages
Language (Hindi)
Dimensions (Cms) 21.7X14X0.5
Weight (grms) 104

आज के दाम्पत्य संबधों में प्रगतिशील सोच विकसित होने के बावजूद जटिलताएं वैसे की वैसे ही बरकरार हैं। कहीं परस्पर अहम् की तुष्टि नहीं हो पाती, तो कहीं स्वाभिमान आपस में टकराने लगता है। वर्जनाओं ने भी नया रूप ग्रहण कर लिया है। पूर्वग्रह एवं कुंठाओं के कांटे तरह-तरह से चुभ रहे हैं। ऐसे में वे दम्पति धन्य हैं, जिनमें आपसी समझबूझ और मानसिकता सुलझी हुई है। आज की जटिल परिस्थितियों में जी रहे दम्पती यदि पूरी तरह सामंजस्य, सहमति एवं सहयोग का व्यवहार करें, तो निश्चय ही दाम्पत्य जीवन सुखी, शांत और समृद्ध होता चला जाएगा। महिला विषयों के लेखक दम्पति शीला सलूजा एवं चुन्नीलाल सलूजा ने अपनी इस महत्त्वाकांक्षी पुस्तक में दाम्पत्य जीवन के तमाम दुराव-छिपाव और तनाव-टकराव दूर करने के ऐसे व्यावहारिक तौर-तरीके बताए हैं, जिनसे प्रेम, सौहार्द एवं सद्भाव का सुखद वातावरण निर्मित होना निष्चित है। आइए, इन समाधानों को निष्ठापूर्वक अपनाएं, एक दूसरे के अस्तित्व का सम्मान करें और अपने दाम्पत्य जीवन को स्वर्ग से भी सुंदर बनाएं।

Sheela Saluja

शीला सलूजा स्त्री विषयों की गहरी सूझ-बुझ रखने वाली प्रखर लेखिका है गृहशोभा , मनोरमा, सरिता, अमर उजाला, ट्रिब्यून, राजस्थान पत्रिका, जागरण, ग्रहलक्षमी जैसी देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं मे उनकी ३५० से भी अधिक रचनाओ प्रकाशित हो चुकी है इसी प्रकार शिक्षा तथा समाज एवं मनोविज्ञान विषयो मे पारंगत लेखक चुन्नीलाल सलूजा की ३३ वर्षो मे लगभग १६०० रचनाएँ छप चुकी है राष्ट्रपति पदक तथा अन्य अनेक पुस्तकारो द्वारा सम्मानित लेखक पत्नी शीला जी के साथ तथा स्वतंत्र लेखक के तौर पर अभी तक इनकी आधा दर्जन से अधिक पुस्तके प्रकाशित हो चुकी है

Chunni Lal Saluja

शिक्षा शास्त्री तथा समाज एवं मनोविज्ञान विषयों मे पारंगत लेखक चुन्नीलाल सलूजा की ३३ वर्षो मे लगभग १६०० रचनाएं छप चुकी है रास्ट्रपति पदक तथा अन्य अनेक पुरस्कारों द्वारा सम्मानित लेखक पत्नी शीला जी के साथ तथा अलग से अभी तक इनकी आधा दर्जन से अधिक पुस्तके प्रकाशित हो चुकी है
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