| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373480299 |
| ISBN-10 |
9373480294 |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
188 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
400 |
| Subject |
Literary Theory, History & Criticism |
समकालीन साहित्य विमर्श में लोकतान्त्रिक विविधता पत्रकारिता विधा में आकर जीवन्त और आधुनिक होती है। भारत की आधुनिक पत्रकारिता स्वतन्त्रता आन्दोलन का मिशनरी चरित्र लेकर चली थी और आज वह व्यावसायिकता का रूप ग्रहण कर चुकी है। सामाजिक दायित्व और प्रतिनिधित्व पसन्द सम्पादक ‘स्वामी अपवाद ही रहे हैं। 1920 से 1950 के दौर की पत्रकारिता को अम्बेडकरी पत्रकारिता ने उपेक्षित’ वंचित और ‘बहिष्कृत भारत’ का पक्ष प्रस्तुत किया।
प्रस्तुत ग्रन्थ की विषयवस्तु, साहित्य के दलित-ग़ैर दलित शीर्ष विमर्शकारों, आलोचकों और पत्रकारों की बहुमूल्य वैचारिकी से सम्पन्न है। अभूतपूर्व ज्ञान, सूचनाएँ पाठकों को यह एक नया अनुभव नयी चेतना से रूबरू करायेगा।
मुख्य धारा की पत्रकारीय ज्ञान-धारा में शामिल होने का सौ साल का सिलसिला आज साहित्य व्यवस्था को लोकतान्त्रिक बनाने के लिए दलित साहित्य विमर्श एक ज़रूरी विमर्श है। पुस्तक उसके लिए आधारभूत अत्यन्त मूल्यवान सामग्री है, जिसमें नये भारत का सपना और स्वतन्त्रता समतामूलक आन्दोलन युगीन ‘दलित मुक्ति’ के प्रश्नों की अनुगूँज सुनायी पड़ती है।
—प्रो. (डॉ.) रजत रानी ‘मीनू’
Sheoraj Singh Bechain
"श्योराज सिंह बेचैन : जन्म : 5 जनवरी, 1960; गाँव-नदरोली, बदायूँ, उत्तर प्रदेश। शिक्षा : पीएच. डी., डी.लिट्.। पूर्व अध्येता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला
Sheoraj Singh Bechain
VANI PRAKSHAN