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Sampadan-Kala : Siddhant Se Vyavahar Tak

Author :

Arun Kumar Bhagat

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs260 Rs325 20% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373480480

ISBN-10 9373480480
Binding

Paperback

Number of Pages 160 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 300
Subject

Literary Theory, History & Criticism

प्रस्तुत पुस्तक 'सम्पादन-कला सिद्धान्त से व्यवहार तक' में सम्पादन के शिल्प और सौन्दर्य को रेखांकित किया गया है। सम्पादन वस्तुतः अनूठी कला और अप्रतिम कौशल है। सम्पादन का तात्पर्य केवल पाठ्य सामग्री में से अशुद्धियों को दूर करना मात्र नहीं है। यह तो पाठ्य-सामग्री के प्रबन्धन, चयन और प्रस्तुति की सम्पूर्ण प्रक्रिया को अपने आप में समेटे हुए है। प्रस्तुत पुस्तक में सम्पादन की इसी व्यापकता को अक्षरित किया गया है। इस पुस्तक में सम्पादन की परिकल्पना, सम्पादन-कला, सम्पादन के सिद्धान्त, सम्पादकीय विभाग का ढाँचागत स्वरूप, शीर्षक लेखन का शिल्प और सौन्दर्य, सम्पादन का शिल्प-विधान, सम्पादन-प्रक्रिया तथा पृष्ठ-सज्जा और अभिकल्प जैसे अध्यायों को शामिल कर इसे छात्रोपयोगी तो बनाया ही गया है, मीडिया प्रोफ़ेशनल्स और मीडिया प्राध्यापकों के लिए भी यह पुस्तक अत्यन्त प्रयोज्य है। मैं वाणी प्रकाशन, दिल्ली के स्वामी-संचालक श्री अरुण माहेश्वरी जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने इस पुस्तक की सुन्दर और सर्व शुद्ध छपाई कर हमें अनुगृहीत किया है। —अरुण कुमार भगत

Arun Kumar Bhagat

अरुण कुमार भगत प्रोफ़ेसर (डॉ.) अरुण कुमार भगत हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता के सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। इनका जन्म बिहार प्रदेश के सहरसा जिला अन्तर्गत ग्राम कासनगर में 4 जनवरी, 1969 ईस्वी को हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा गाँव के प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय में हुई। आपने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से एम.जे.एम.सी. की उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद आपने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से पीएच.डी. की शोधोपाधि प्राप्त की। समाचार-सम्पादन और संकलन के क्षेत्र में आपने देश के अनेक लोकप्रिय समाचार-पत्रों में विभिन्न पदों पर काम करते हुए पत्रकारिता के क्षेत्र में सुदीर्घ अनुभव प्राप्त किया है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में 14 वर्षों तक अध्यापन करने के बाद आप नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ऐंड लाइब्रेरी, दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी अध्येता भी रहे हैं। आप महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी में मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष और अधिष्ठाता रहे। अब तक आपके द्वारा लिखित और सम्पादित कुल 28 पुस्तकें प्रकाशित हैं। साहित्य और समालोचना के क्षेत्र में प्रो. भगत की उल्लेखनीय सेवा-साधना के लिए उन्हें 'राष्ट्रधर्म' पत्रिका, लखनऊ से 'राष्ट्रधर्म गौरव सम्मान : 2016' से अलंकृत किया गया। सन् 2018 में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर आपको 'भाषा मित्र सम्मान' से अलंकृत किया। साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल ने डॉ. अरुण कुमार भगत को कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए 'अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल आलोचना सम्मान' से अलंकृत किये जाने की घोषणा की है। डॉ. भगत को यह अखिल भारतीय कृति पुरस्कार उनकी पुस्तक पत्रकारिता सर्जनात्मक लेखन और रचना प्रक्रिया के लिए प्रदान किया गया है। आपने भूटान, नेपाल, मॉरिशस और फ़ीजी देशों की सांस्कृतिक यात्राएँ की हैं। शासकीय दायित्व 1. पूर्व सदस्य, कार्य-परिषद्, महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा। 2. पूर्व सदस्य, परामर्शदात्री समिति, दिल्ली स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली। 3. पूर्व सदस्य, कार्यकारिणी, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार। 4. पूर्व सदस्य, साधारण सभा, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार। 5. पूर्व सदस्य, साहित्य अकादेमी, भारत की सर्वोच्च एवं स्वायत्तशासी साहित्यिक संस्था (भारत सरकार द्वारा सम्पोषित)। 6. पूर्व परियोजना निदेशक, मेजर प्रोजेक्ट, इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च, नयी दिल्ली, भारत सरकार। 7. पूर्व सदस्य, बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा। 8. पूर्व न्यासी सदस्य, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली, भारत सरकार। 9. पूर्व सदस्य, विशेषज्ञ समिति, हिन्दी साहित्य फेलोशिप, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार। महामहिम राज्यपाल, बिहार सरकार ने आपको 16 जुलाई, 2020 को बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के माननीय सदस्य के रूप में नामित किया।
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