| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373486765 |
| ISBN-10 |
9373486764 |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
218 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
300 |
| Subject |
Literary Theory, History & Criticism |
उत्तर-मानववाद मनुष्य, तकनीक, नैतिकता और भविष्य के अन्त:सम्बन्धों पर एक गहन और बहुआयामी चिन्तन है। यह पुस्तक उस परिवर्तनशील युग का साक्ष्य प्रस्तुत करती है जहाँ मानवता अपनी पारम्परिक सीमाओं और स्थिर परिभाषाओं से आगे बढ़कर नये अस्तित्व, नयी संवेदनाओं और नयी नैतिकताओं की
ओर अग्रसर है। आधुनिक विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी,डिजिटल संस्कृति और पर्यावरणीय संकटों के बीच यह पुस्तक एक बुनियादी प्रश्न उठाती है–आज के समय में मनुष्य होने का अर्थ क्या है?
विवेक सिंह और ऋषभ कुमार इस
पुस्तक में मानव-केन्द्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए ऐसा विमर्श प्रस्तुत करते हैं, जो ‘मानव’ को केन्द्र से हटाकर ‘सम्बन्धों’,
‘सह-अस्तित्व’ और ‘साझी संवेदना’ के व्यापक आयाम में स्थापित करती है। यहाँ दर्शन, संस्कृति, राजनीति और नैतिकता के बीच एक जटिल लेकिन सुसंगत संवाद स्थापित
होता है, जो पाठक को यह सोचने पर विवश करता है कि जब मनुष्य और मशीन, जैविक और कृत्रिम, जीवित और निर्जीव के बीच की सीमाएँ धुँधली होने लगती हैं, तब चेतना, अनुभूति और ज़िम्मेदारी के नये रूप किस प्रकार आकार लेते हैं।
यह पुस्तक समकालीन बौद्धिक परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप है, जो मानवता को केवल एक जैविक या सांस्कृतिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक और संवेदनात्मक सम्भावना के रूप में देखता है। यह पुस्तक पाठक को उस अनिवार्य आत्म-संवाद की ओर ले जाती है जहाँ वह अपने अस्तित्व, तकनीकी निर्भरता, और भविष्य की दिशा पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित होता है। उत्तर-मानववाद सिर्फ़ विचारों की पुस्तक नहीं, बल्कि हमारे समय के सबसे गहरे सवालों से जुड़ा एक गम्भीर संवाद है, जो पाठक को सोचने, सवाल करने और नये अर्थ समझने के लिए प्रेरित करती है।
Vivek Singh
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार वर्तमान में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के अंग्रेज़ी विभाग में शोधरत हैं। उनका शोध कार्य Film Studies और Disability Studies के अन्त:सम्बन्धों पर केन्द्रित है। वे उत्तर-मानववाद (Post-Humanism) के विचारों में गहरी रुचि रखते हैं और इन सिद्धान्तों के माध्यम से आधुनिक सिनेमा में मानवता, शरीर और तकनीक के बदलते सम्बन्धों को समझने का प्रयास कर रहे हैं।
Vivek Singh
,Rishabh Kumar
VANI PRAKSHAN