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Urdu Shayari Ka Saundarya Aur Sammohan

Author :

Gyan Prakash Vivek

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs476 Rs595 20% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373488530

ISBN-10 9373488538
Binding

Hardcover

Number of Pages 236 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 400
Subject

Literary Theory, History & Criticism

स्वभाव की दृष्टि से नज़्म, ग़ज़ल से सर्वथा भिन्न है। नज़्म में विवरण होते हैं। एक केन्द्रीय विषय, पूरी नज़्म में निहित रहता है। शायर विषय को विस्तार देते हुए कहीं भी चला जाये, वह अपने मूल आन्तरिक विषय और आन्तरिक लय की ओर लौट आता है। ग़ज़ल में विचारों का बिखराव होता है। यहाँ विवरण नहीं होते। दो पंक्तियों में एक अदद सोचे गये विषय को व्यक्त करने की कठिन यात्रा होती है। यह दो पंक्तियों का एक शेर, अपने आप में एक कविता जैसा अर्थ और भाव पैदा करने में सफल होता है। डॉ. रामदास नादार भी ग़ज़ल की उत्पत्ति, तशबीब से मानते हैं। उनके अनुसार, ‘‘उर्दू शायरी, फ़ारसी शायरी का अनुसरण है और फ़ारसी अरबी का। अरबी शायरी में कसीदों (प्रशंसा गीत) की तशबीब (आरम्भ) में, ग़ज़ल भी शामिल थी। कसीदों के आरम्भ में, आशिकाना (प्रेम परक) विषय भी लिखे जाते थे। इसको ग़ज़ल अथवा तगज़्ज़ुल कहा जाता था। फ़ारसी कवियों ने इस अंश को, ग़ज़ल के नाम से, एक स्थायी काव्य रूप बना दिया।’’

Gyan Prakash Vivek

जन्म : 30 जनवरी, 1949 (बहादुरगढ़) तैंतीस वर्ष तक एक साधारण बीमा कम्पनी में नौकरी और सेवानिवृत्ति के बाद पूर्णकालिक लेखन। प्रकाशित पुस्तकें : उपन्यास : गली नम्बर तेरह, दिल्ली दरवाज़ा, अस्तित्व, आखेट, चाय का दूसरा कप, तलघर, डरी हुई लड़की, नयी दिल्ली एक्सप्रेस, विस्थापित तथा व्हीलचेयर। कहानी- संग्रह : अलग-अलग दिशाएँ, जोसफ़ चला गया, शहर गवाह है, पिताजी चुप रहते हैं, इक्कीस कहानियाँ, शिकारगाह, सेवानगर कहाँ है, मुसाफ़िरख़ाना, बदली हुई दुनिया, कालखण्ड, मेरी पसन्दीदा कहानियाँ, छोटी-सी दुनिया तथा अन्य कहानियाँ। गज़ल-संग्रह : धूप के हस्ताक्षर, आँखों में आसमान, इस मुश्किल वक़्त में, गुफ़्तगू अवाम से है, घाट हज़ारों इस दरिया के, दरवाज़े पर दस्तक, काग़ज़ी छतरियाँ बनाता हूँ। कविता-संग्रह : दरार से झाँकती रोशनी। आलोचना : हिन्दी ग़ज़ल की विकास यात्रा, हिन्दी ग़ज़ल दुष्यन्त के बाद, हिन्दी ग़ज़ल की नयी चेतना, हिन्दी ग़ज़ल की शक्ति और संचेतना तथा हिन्दी ग़ज़ल व्यापकता और विस्तार। उर्दू शायरी : रिवायत से जदीदियत का सफ़र। फ़ेलोशिप : वर्ष 2014-2015 में संस्कृति मन्त्रालय द्वारा हिन्दी गज़ल पर सीनियर फ़ेलोशिप। फ़िल्म तथा लघु फ़िल्में : ‘क़ैद’ कहानी पर जनमंच द्वारा फ़िल्म का निर्माण। शिमला दूरदर्शन द्वारा ‘मोड़’ तथा ‘बेदख़ल’ कहानियों पर लघु फ़िल्मों का निर्माण। क्लासिक कहानियों की शृंखला में, वाराणसी दूरदर्शन केन्द्र द्वारा ‘शिकारगाह’ कहानी का फ़िल्मांकन। ‘छोटी-सी दुनिया’, ‘बूढ़ा’, ‘पापा तुम कहाँ हो’, ‘क्षमा करना माँ’ का नाट्य मंचन। सम्मान : हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2021 में आजीवन साहित्य साधना सम्मान। इन्दु शर्मा अन्तर्राष्ट्रीय कथा सम्मान (यूके) डरी हुई लड़की को वर्ष 2021 में, सेवानगर कहाँ है कहानी को राजस्थान पत्रिका द्वारा वर्ष 2000 में सर्वश्रेष्ठ कथा सम्मान। भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता द्वारा कर्तृत्व समग्र सम्मान 2025।
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