| Publisher |
VANI PRAKSHAN |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373481722 |
| ISBN-10 |
937348172X |
| Binding |
Hardcover |
| Number of Pages |
1440 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
2250 |
| Subject |
Literary Theory, History & Criticism |
भाग - 1 समग्र भारतीय पत्रकारिता पहली सदी : 1780-1880
यह भारतीय पत्रकारिता का आधार ग्रन्थ है। हिन्दी में भारतीय पत्रकारिता का यह पहला सन्दर्भ ग्रन्थ है। इसे पत्रकारिता का पुराण भी माना जा सकता है। ऐसा पुराण जिसमें कथा तो है किन्तु काल्पनिकता की जगह यथार्थपरक घटनाएँ हैं। भारतीय पत्रकारिता के अतीत के अध्ययन के लिए यह पुस्तक एक इतिहास ग्रन्थ भी है, शोध ग्रन्थ भी है और आलोचनात्मक ग्रन्थ भी है। तथ्य की ठोस आधारभूमि पर पत्रकारिता की तत्वगत यात्रा के लिए इसमें रास्ते की पोषक खुराक भी उपलब्ध है, जिस पर चलकर पाठक इसे अनुभव कर सकते हैं। पत्रकारिता के राही इसे साथ रखें तो उन्हें तथ्य, तत्व और उसकी खुराक हमेशा मिलती रहेगी।
—रामबहादुर राय
भाग - 2 समग्र भारतीय पत्रकारिता तिलक युग : 1881 -1920
अंग्रेजी समेत समस्त भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता का ऐसा प्रत्यक्ष परिचय देने वाली कोई और पुस्तक हिन्दी में तो निश्चित रूप से नहीं है। अन्य किसी भाषा में भी शायद नहीं है। सबसे बड़ी चीज है उसकी परिकल्पना और विषय व्याप्ति। इस बात को भारतीय पत्रकारों और पत्रकारिता के विद्यार्थियों को हृदयंगम कराना बहुत जरूरी है कि चार-छह एंग्लो-इंडियन अखबारों को छोड़कर अंग्रेजी समेत तमाम भारतीय पत्र-पत्रिकाओं की अंतरवस्तु एक है और उसे एक ही महानदी या महानद समझकर उसका अध्ययन किया जाना चाहिए। इस अनूठे उपक्रम ने हम सबको सदा के लिए ऋणी बना लिया है। यह ऐसा ऋण है जिसे ढोने में सुख और लाभ है।
—नारायण दत्त
भाग - 3 समग्र भारतीय पत्रकारिता गांधी युग : 1921 -1948
भारतीय पत्रकारिता का इतिहास चंद अपवादों को छोड़कर अदम्य संघर्ष, बलिदान और ध्येयवादी मूल्यों से सिंचित राष्ट्रीयता का इतिहास है। तीन खण्डों में 245 वर्षों की पत्रकारिता के तथ्यों और प्रवृत्तियों को संकलित और विश्लेषित करना निश्चित ही एक असाधारण उद्यम है। इसके महत्व और उपादेयता का क्षेत्र इतना व्यापक है कि मीडिया से जुड़े लोगों में ही नहीं बल्कि इतिहास, राजनीति और संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाले अध्येताओं और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी यह ग्रन्थ नितान्त उपयोगी होगा।
—अच्युतानंद मिश्र
Vijaydutt Sridhar
विजयदत्त श्रीधर, पत्रकारिता में छह दशक का अनुभव। माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल की स्थापना, पत्रकारिता विषयक शोध एवं इतिहास प्रलेखन के प्रामाणिक प्रयत्नों के लिए वर्ष 2012 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित। ‘पहला सम्पादकीय’ पुस्तक के लिए ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार’ (2011)। शिक्षा एवं शोध में असाधारण अवदान के लिए मध्यप्रदेश का ‘महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान’ (2012-13)। छत्तीसगढ़ का ‘माधवराव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान’ (2015)। हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की ‘साहित्य वाचस्पति’ उपाधि से सम्मानित (2025)।
सम्पर्क : 7999460151
ईमेल : sapresangrahalaya@yahoo.com
Vijaydutt Sridhar
VANI PRAKSHAN