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Prachin Bharat : Sanskriti Ke Paanch Antarvirodh

Author :

Upinder Singh, Translated by Abhishek Srivastava

Publisher:

VANI PRAKSHAN

Rs399 Rs499 20% OFF

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Publisher

VANI PRAKSHAN

Publication Year 2026
ISBN-13

9789373486703

ISBN-10 9373486705
Binding

Paperback

Number of Pages 304 Pages
Language (Hindi)
Weight (grms) 350
Subject

Literary Theory, History & Criticism

प्राचीन भारत : संस्कृति के पाँच अन्तर्विरोध में भारत की प्रतिष्ठित इतिहासकार उपिंदर सिंह पाठकों को सुदूर अतीत की खोज के एक आह्लादकारी सफ़र पर ले जाती हैं। प्राचीन भारत के सन्दर्भ में, वे हमसे सरल रूढ़ियों को त्यागने का आग्रह करते हुए, पाँच सशक्त अन्तर्विरोधों के सह-अस्तित्व के रूप में उस पर विचार करने को कहती हैं : सामाजिक असमानता और सार्वभौमिक मुक्ति, काम और वैराग्य का मूल्य, देवी-पूजा और स्त्री-द्वेष, हिंसा और अहिंसा, तथा धार्मिक संवाद और टकराव के बीच अन्तर्विरोध। इसके लिए उन्होंने व्यापक स्रोतों का उपयोग किया है, जिनमें धार्मिक और दार्शनिक ग्रन्थ, महाकाव्य, कविता, नाटक, तकनीकी प्रबंध, प्रहसन, आत्मकथाएँ, अभिलेख सहित समूचे उपमहाद्वीप के विविध स्थलों से पुरातत्त्व व कला के भौतिक व सौन्दर्यशास्त्रीय साक्ष्य शामिल हैं। सिंह की विद्वत् किन्तु सुबोध शैली, स्पष्ट वर्णन, और सन्तुलित व्याख्याएँ बतौर इतिहासकार उनके शिल्प की समझदारी देती हैं, और हम जिसे प्राचीन भारतीय संस्कृति समझते हैं, उसके कई रेशों को खोलती हैं। यह कोई मृत या भुलाया जा चुका अतीत नहीं है, बल्कि आज भी विभिन्न सन्दर्भों में उसका आवाहन किया जाता है। इतना ही नहीं, सदियों के दौरान हुए विशाल ऐतिहासिक बदलावों के बावजूद, वे अन्तर्विरोध आज भी क़ायम हैं जिन पर यहाँ चर्चा की गयी है। प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक कला की उत्कृष्टतम कृतियों से पर्याप्त सुसज्जित, ख़ूबसूरती से लिखी गयी और गहन रूप से मौलिक, प्राचीन भारत : संस्कृति के पाँच अन्तर्विरोध प्राचीन भारत और वर्तमान के साथ उसके रिश्तों की समृद्ध जटिलता को दमदार व स्पष्ट तरीक़े से जीवन्त करती है।

Upinder Singh, Translated by Abhishek Srivastava

उपिंदर सिंह उपिंदर सिंह अशोक यूनिवर्सिटी में इतिहास की प्रोफ़ेसर हैं। उनकी रुचि के विषयों में प्राचीन भारतीय इतिहास और पुरातत्त्व, विचारों का इतिहास और व्यापक जगत के साथ भारत के सम्बन्ध शामिल हैं। उन्होंने निम्न किताबें लिखी हैं : किंग्स, ब्राह्मन्स ऐंड टेम्पल्स इन ओडिशा : ऐन एपिग्राफिक स्टडी (300-1147 सा.सं.); द डिस्कवरी ऑफ़ एन्शियेंट इंडिया : अर्ली आर्कियोलॉजिस्ट्स ऐंड द बिगिनिंग्स ऑफ़ आर्कियोलॉजी; ए हिस्ट्री ऑफ़ एन्शियेंट ऐंड अर्ली मिडीवल इंडिया : फ्रॉम द स्टोन एज टू द ट्वेल्फ्थ सेंचुरी; द आइडिया ऑफ़ एन्शियेंट इंडिया : एसेज़ ऑन रिलिजन, पॉलिटिक्स ऐंड आर्कियोलॉजी; और पॉलिटिकल वायलेंस इन एन्शियेंट इंडिया। उन्होंने निम्न किताबों का संपादन किया है : दिल्ली : एन्शियेंट हिस्ट्री; रीथिंकिंग अर्ली मिडीवल इंडिया; और द वर्ल्ड ऑफ़ इंडियाज़ फर्स्ट आर्कियोलॉजिस्ट : लेटर्स फ्रॉम अलेग्जेंडर कनिंघम टू जे.डी.एम. बेगलर। उन्होंने एन्शियेंट इंडिया : न्यू रिसर्च; एशियन एनकाउंटर्स : एक्सप्लोरिंग कनेक्टेड हिस्ट्रीज़; और बुद्धिज़्म इन एशिया : रिवाइवल ऐंड रीइन्वेन्शन का सह-सम्पादन किया है। ****** अभिषेक श्रीवास्तव अभिषेक श्रीवास्तव पत्रकार हैं और वर्तमान में विश्व मामलों की भारतीय परिषद (आइसीडब्ल्यूए) की विद्वत्-समीक्षित पत्रिका इंडिया क्वार्टरली (हिन्दी) का सम्पादन कर रहे हैं। उन्होंने निम्न किताबें लिखी हैं :देसगाँव : भारत के लोगों और आन्दोलनों की ज़िन्दा दास्तान; आम आदमी के नाम पर : भ्रष्टाचार विरोध से राष्ट्रवाद तक दस साल का सफ़रनामा; और कच्छ कथा : साझे अतीत की तलाश का सफ़रनामा। उन्होंने दर्जन भर से ज़्यादा अनुवाद किये हैं, जिनमें निम्न प्रमुख हैं : 1984 (जॉर्ज ऑरवेल), हाउ डेमोक्रेसीज़ डाइ (स्टीवेन लेवित्सकी और डेनियल जिब्लाट), रम्बल इन ए विलेज (ज्यां द्रेज और लुक लेरुथ), ब्लैक इकनॉमी (प्रो. अरुण कुमार), रेबेल्स अगेंस्ट द राज (रामचन्द्र गुहा), बिटवीन होप ऐंड डिस्पेयर (प्रो. राजीव भार्गव), और द आरटीआइ स्टोरी (अरुणा रॉय)।
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